Dhanteras 2021 : धनतेरस पर बन रहा खरीददारी का महासंयोग, जानें धनतेरस मनाने का कारण और पूजा विधि

तारीख

तारीख – मंगलवार, 2 नवंबर 2021

धनतेरस पूजन मुर्हुत – शाम 06:18 बजे से रात 08:10 बजे तक

प्रदोष काल – शाम 05:32 से रात 08:10 बजे तक

वृषभ काल –  शाम 06:18 से रात 08:13 बजे तक

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ – सुबह 11:31 बजे (2 नवंबर 2021) से

त्रयोदशी तिथि समाप्त – सुबह 09:02 बजे (3 नवंबर 2021)  तक (dhanteras 2021 )

धमतेरस के पीछे धन्वंतरि का अवतरण ( dhanteras 2021 )

धनतेरस कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को होती है। इस दिन कुछ नया खरीदने की परंपरा है। पीतल व चांदी के बर्तन खरीदने का रिवाज़ है। माना जाता है कि इस दिन घर में कुछ नया आना लाभदायी होता है। धन्वंतरि इसी दिन अवतरित हुए थे इसी कारण इसे धनतेरस कहा जाता है। धन्वन्तरि की भी पूजा की जाती है| जैन आगम में धनतेरस को ‘धन्य तेरस’ या ‘ध्यान तेरस’ कहते हैं| धनतेरस का दिन राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस भी है|

देवताओं व असुरों द्वारा संयुक्त रूप से किये गये समुद्र मंथन के दौरान प्राप्त हुए चौदह रत्नों में धन्वन्तरि व माता लक्ष्मी शामिल हैं। धन्वन्तरी जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था| कलश के कारण ही इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है| विशेषकर पीतल और चाँदी के बर्तन खरीदने चाहिए,  क्योंकि पीतल महर्षि धन्वंतरी का धातु है| इससे घर में आरोग्य, सौभाग्य और स्वास्थ्य लाभ बनताहै| धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर और यमदेव की पूजा का भी खास महत्त्व है| ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पुष्य नक्षत्र में घर, जमीन, सोने-चांदी के गहने, वाहन या इलेक्ट्रानिक्स आइटम खरीदना शुभ रहता है। इस दिन बीमा पॉलिसी, शेयर मार्केट में निवेश से भी लाभ की प्राप्ति हो सकती है। सनातन धर्म में पुष्य नक्षत्र में किसी नए काम की शुरुआत करना शुभ माना जाता है। इस दिन नए बहीखाते या कलम-दवात खरीदने से काम-काज की शुभता बढ़ती है।( dhanteras 2021 )

धनतेरस पर खरीददारी का महामुहुर्त

भगवान धनवंतरी की पूजा करने से घर में कभी धन धान्य की कमी नहीं होती। इस दिन पूजा का समय शाम 6:37 मिनट से रात 8 बजकर 34 मिनट तक है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, दिवाली से पहले खरीदारी के लिए महामुहूर्त बन रहा है। दरअसल गुरु पुष्य नक्षत्र 60 साल बाद शनि-गुरु की युति में आ रहा है। 28 अक्टूबर को शनि और गुरु की युति रहेगी, जिससे पुष्य नक्षत्र की शुभता बढ़ेगी। इस दिन खरीदारी का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 33 मिनट से सुबह 09 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। इससे पहले ऐसा शुभ संयोग साल 1961 में बना था।

धनतेरस पर दक्षिण दिशा में दीया जलाएं ( dhanteras 2021 )

धनतेरस पर दक्षिण दिशा में दिया जलाया जाता है। इसके पीछे  कहानी है। एक दिन यमलोक में यमदूत ने बातों ही बातों में यमराज से पूछा कि अकाल मृत्यु से बचने का कोई उपाय है? इसका जवाब देते हुए यमदेव ने कहा कि जो प्राणी धनतेरस की शाम यम के नाम पर दक्षिण दिशा में दिया जलाकर रखता है उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती| इसकी मान्यता में धनतेरस की शाम लोग आँगन में यम देवता के नाम पर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाते है। यदि घर की लक्ष्मी इस दिन दीपदान करें तो पूरा परिवार स्वस्थ रहता है|

धनतेरस पूजा

संध्या में पूजा करने का विशेष फल। पूजा स्थान पर उत्तर दिशा की तरफ भगवान कुबेर और धन्वन्तरि की मूर्ति स्थापना करें। साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की पूजा का भी विधान है| भगवान कुबेर को सफेद मिठाई, जबकि धनवंतरि‍ को पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए | धन्वन्तरि को पीली वस्तु अधिक प्रिय है|  पूजा में फूल, फल, चावल, रोली, चंदन, धूप व दीप का इस्तेमाल करते है। ( dhanteras 2021 )

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